8+ बाल मजदूरी पर कविता Anti Child Labour Day Poem in Hindi

Anti Child Labour Day Poem in Hindi बाल मजदूरी या बाल श्रम वर्तमान समय में एक चिंता का विषय बन चुका है। इससे ना केवल बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है बल्कि आने वाला कल इससे प्रभावित हो सकता है। छोटे-छोटे बच्चों की मज़बूरी का फायदा उठाकर बाल श्रम को बढ़ावना देने वाले लोगों के ऊपर सख्त से सख्त कार्रवाई होती है। लेकिन इतने सख्ती के बाद भी बच्चों से मजदूरी कराई जाती है।

Anti Child Labour Day Poem in Hindi

हर साल 12 जून विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को बाल श्रम के प्रति जागरूक करना तथा बाल श्रम को बढ़ावा देना पर रोक लगाने के लिए प्रेरित करना होता है। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के सम्मान में आज हम बाल मजदूरी पर कविता,बाल शोषण पर कविता शेयर कर रहे है।

इन बाल मजदूरी पर कविता, बाल शोषण पर कविता, Child Labour Poem in Hindi का प्रयोग आप अपने आसपास हो रहें हैं विश्व बाल श्रम दिवस कार्यक्रम एवं रैली आयोजन में कर सकते है। आप यहां प्रस्तुत किए गए सर्वश्रेष्ठ बालश्रम पर कविताओं का उपयोग कर सकते है।

Anti Child Labour Day Poem in Hindi – बाल मजदूर मजबूर है

कंधों पर जीवन का बोझ,
किताबों की जगह है रद्दी का बोझ।

जिस मैदान पर खेलना था,
उसको साफ करने ही जीवन बचा।

जिस जीवन में हंसना था,
वो आंसू पी कर मजबूत बना।

पेट भरना होता क्या है,
आज तक उसे मालुम नहीं।

चैन की नींद सोना क्या है,
आज तक उसने जाना नहीं।

बचपन कहां खो गया,
वो मासूम क्या बताएगा।

जीवन सड़क पर गुजर गया,
वो यादें क्या बताएगा।

कभी धिक्कार के धक्के से,
वो भूखा भी सो जाता है।

बाल मजदूरी पाप है,
नियम तो बना दिया।

ये उसके हित में है,
या जीवन कठिन बना दिया।

जब आज खतरे में है,
वो क्या जीवन बनाएगा।

जब पेट की भूख ही चिंता है,
तो वो क्या पढ़ने जाएगा।

बाल मजदूर मजबूर है,
नियम ओर सताता है।

अगर देश को मजबूत बनाना है,
तो इस मजबूरी को हटाना है।

Child Labour Day Poem in Hindi – बच्चे है हम

बच्चे है हम,
हमें जीने दो।

रोटी, कपड़े
की लालच में।

न जहर हमारे,
बचपन में घोलो।

क्या बचपन मेरा,
फिर आएगा।

दो घूंट खुशी के,
पी लेने दो।

बच्चे है हम,
हमें जी लेने दो।

बालश्रम पर कविता – यहीं सही वक्त है

Anti Child Labour Day Poem in Hindi

यह सही वक्त है,
कुछ करने का,
कुछ बदलने का।

क्योंकि कोमल बच्चे,
जूझ रहे है,
कण्ठ भरें अंगारो में,
और रोते है,
अंधेरे में।

बंद करों यह,
बाल श्रम।

बच्चों का यह,
क्रूर समझौता,

नहीं रहेगा,
कोई भी बच्चा।

इसी आड़ में,
अब रोता।

बंद करों,
बाल श्रम।

यहीं सही वक्त है,
कुछ करने का।

कुछ बदलने का।

Poem on Stop Child Labour in Hindi – गुमनाम अंधेरे में

किस गुमनाम अंधेरे में,
ऐ भारत तू पनप रहा।

जहां यूवा बल ही है शक्ति,
कैसे अंधेरा गहरा रहा।

जिन हाथों होना था क़लम दवात,
वो कैसे ईंट गारो में सन रहा।

कैसे मासूम सा फ़रिश्ता,
दो वक्त की कमाने निकल रहा।

किन कंधो पर बोझ डाल,
ऐ जीवन तू गुजर रहा।

जो ममता के आंचल में खिलना था,
वो कैसे कीचड़ से लिपट रहा।

जिन मासूम की आँखों में,
कोई सपना भी भूल कर ना आये।

जिन नन्हों के जीवन में,
कोई अक्षर ज्ञान भी ना छाये।

जिनके कोमल बचपन पर,
बस मजबूरी ही लहराए।

ऐसे अभागे बचपन ही,
बाल श्रमिक कहलाएं।

Small Poem on Child Labour in Hindi – लाचीरी की मार से

लाचारी-गरीबी की मार से,
मेरा नन्हा कोमल बचपन कहीं खो गया।

है नहीं रहने का ठिकाना,
फुटपाथ ही अब मेरा घर हो गया।

चाहिए था होना कन्धों पर किताबों का झोल।

दो वक्त की रोटी का जुगाड,
ही तकदीर बन गया।

मुझे भी चाहिए थी कलम,
औरो की तरह।

ये सपना तो बस,
एक सपना बनके रह गया।

क्या जमाने की मतलबी,
निगाहे नहीं पड़ती मुझ पर।

या इंसान के अंदर का,
जमीर ही मर गया।

मुझे भी चाहिए है,
ममता की घनी छांव।

ईश्वर तो मुझे,
मेरा हक देना ही भूल गया।

बाल मजदूरी पर कविता – फूल बेचता फिरता है

फूल बेचता फिरता है,
कभी पेन किताब दिखता है,
सड़कों पे।

यकीन उसका मन,
भी कुछ लिखने को,
कर जाता होगा।

खेल का मैदान,
नहीं है।

भूखे जिस्म में जान,
नहीं है।

करवाते हो मजदूरी,
दिन भर।

ये बच्चा क्या
इंसान नहीं।

मैं सोचता हूं क्या इंसान?
क्या भगवान।

कोई इसके लिए,
परेशान नहीं है।

कोई तो संभालों इसको,
मेरे देश की क्या ये पहचान,
नहीं है।

यूं मत रोंदो,
बचपन इनका।

जीवन है जीवन,
इंसान नहीं है।

Bal Majduri Poem in Hindi – बाल श्रमिक पर चर्चा

बाल श्रमिक पर चर्चा,
केवल हम सब करते।

हालत उनकी देख के,
झूठी आहें भरते।

सोचो अपने बच्चों से भी,
क्या हम ये करवाते।

करवाना तो दूर,
सोच कर,
नयन भर आते।

आँखों में छोटू स्थान,
पे पुत्र को लाओ।

फिर उस बालाक को,
अपना इंसाफ दिलाओ।

बाल श्रमिक निषेध दिवस,
है आज मना लो।

निष्ठुर हाथों के जुल्मों,
से बालक को बचा लो।

Poem on Child Labour in Hindi – बचपन के दिनों में

जिस बचपन के दिनों,
में हंसना कूदना था‌।

वे तो मजदूरी के,
दलदल में कूद पड़ा।

यह कोई मजाक,
का खेल नहीं है।

भूखे पेट में,
जान नहीं है।

करवाते हो मजदूरी,
दिनभर।

क्या ये बच्चा,
इंसान नहीं है।

उनका बचपन,
कहां खो गया।

भला वो बच्चा,
क्या जाने।

जीवन तो गली,
नुक्कड़ में खो गया।

भला वो यादें,
क्या बनाएगा।

नन्हें का बचपन,
तो मजदूरी में खो गया।

FAQ

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?

हर साल 12 जून विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को बाल श्रम के प्रति जागरूक करना तथा बाल श्रम को बढ़ावा देना पर रोक लगाने के लिए प्रेरित करना होता है।

बाल श्रम अधिनियम 1986 कब लागू हुआ?

बाल और किशोर श्रम अधिनियम भारत की संसद और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा 23 दिसंबर 1986 अधिनियिमत किया गया है।

बाल मजदूरी कराने की क्या सजा है?

बाल श्रम नियमों के अंतर्गत अगर कोई व्यक्ति व्यवसाय के प्रति 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे से कार्य कराता है तो उस व्यक्ति को 2 साल की सजा और 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।

बाल मजदूरी बढ़ने के मुख्य कारण क्या है?

भारत में बाल मजदूरी या बाल श्रम तेजी से बढ़ने के कई कारण हैं जैसे की बेरोजगारी, गरीबी और सामाजिक मात्र दंड शामिल है।

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अंतिम शब्द –

आशा रखते हैं उपलब्ध कराई गयी Anti Child Labour Day Poem in Hindi आपको अच्छी लगी होगी। अगर यह बाल मजदूरी पर कविता, Poem on Child Labour in Hindi अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें। इसके बारे में अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट करके जरूर बताएं।

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